लोकसभा-विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण देने वाला संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा से नहीं हो सका पारित

लोकसभा-विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण देने वाला संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा से नहीं हो सका पारित

लोकसभा-विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण देने वाला संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा से नहीं हो सका पारित

लोकसभा में कल संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पारित नहीं हो सका। इस विधेयक में लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षि‍त रखने का प्रावधान था। लोकसभा में उपस्थित कुल 528 सदस्यों में 298 सांसदों ने इसके पक्ष में और 230 ने इसके विरोध में मतदान किया, जो दो तिहाई बहुमत से कम था। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मतदान का परिणाम घोषित करते हुए कहा कि विधेयक को पारित करने के लिए आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण इसे आगे बढ़ाना संभव नहीं है।

विधेयक पारित न होने पर भाजपा की महिला सांसदों ने संसद भवन परिसर में कांग्रेस और विपक्षी दलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने जानबूझकर महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के उद्देश्य से लाए गए इस विधेयक को रोका है। उन्‍होंने नारे लगाते हुए आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व वाले विपक्ष ने जानबूझकर विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के उद्देश्य से लाए गए एक विधेयक को बाधित किया।

गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक के लिए समर्थन न देने पर विपक्ष की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उनकी मानसिकता न तो महिलाओं के हित में है और न ही देश के हित में। श्री शाह ने विधेयक पारित न होने के बाद विपक्ष के जश्न को दशकों से अपने अधिकारों का इंतजार कर रही महिलाओं का अपमान बताया।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर महिलाओं को आरक्षण प्रदान करने का अवसर गंवाने का आरोप लगाया।

इससे पहले, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के लिए आरक्षण विधेयक नहीं है और इसका महिलाओं के सशक्तिकरण से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन विधेयकों को संसद में लाकर चुनावी मानचित्र को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। श्री गांधी ने आरोप लगाया कि इससे दलितों और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को समाज में उनके उचित स्थान से वंचित किया जाएगा। गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि महिलाओं के लिए आरक्षण विधेयक जाति जनगणना को दरकिनार करने के उद्देश्य से लाया गया है और यह अन्य पिछड़ा वर्ग, दलितों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव की अनदेखी करता है।