रक्षा मंत्री ने कहा- तेजी से आत्मकेंद्रित होते देशों के बीच एससीओ एकता और सहयोग का प्रतीक है

रक्षा मंत्री ने कहा- तेजी से आत्मकेंद्रित होते देशों के बीच एससीओ एकता और सहयोग का प्रतीक है

रक्षा मंत्री ने कहा- तेजी से आत्मकेंद्रित होते देशों के बीच एससीओ एकता और सहयोग का प्रतीक है
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज शंघाई सहयोग संगठन – एससीओ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे समय में जब वैश्विक दृष्टिकोण में भिन्‍नता है और देश तेजी से आत्‍म केंद्रित होते जा रहे हैं ऐसे में एससीओ विश्व की कुछ सबसे प्राचीन सभ्यताओं का घर है और सबको एकजुट किए हुए है। किर्गिस्तान के बिश्केक में एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में श्री सिंह ने कहा कि हमारा क्षेत्र प्राचीन व्यापार मार्गों की उद्यमशीलता की भावना और हमारे लोगों की वीरता और साहस को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत एक अनूठी संस्कृति का हिस्सा है जहां सभ्यताएं आपस में मिलती हैं, समुदाय परस्पर संपर्क में रहते हैं और वाणिज्य अंतर-सांस्कृतिक आदान-प्रदान से जुड़ा हुआ है।
 
पहलगाम में हुए जघन्य आतंकवादी हमले के पीड़ितों को याद करते हुए श्री सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने यह दृढ़ संकल्प प्रदर्शित किया कि आतंकवाद के गढ़ अब न्यायोचित दंड से मुक्त नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष तियानजिन घोषणापत्र ने आतंकवाद के खिलाफ हमारे दृढ़ और सामूहिक रुख को उजागर किया।
 
रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारे क्षेत्र के शांतिपूर्ण भविष्य के लिए एससीओ को अंतरराष्ट्रीय मानकों के निरंतर संरक्षक के रूप में कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आज की चर्चा से साझा सुरक्षा चुनौतियों की समझ और गहरी होगी और रक्षा तथा सुरक्षा क्षेत्र में भविष्य के सहयोग के नए क्षेत्रों का पता चलेगा। श्री सिंह ने दोहराया कि भारत एससीओ के जनादेश के कार्यान्वयन में रचनात्मक योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने समानता, आपसी सम्मान और गहरी समझ के आधार पर एससीओ सदस्यों के बीच अधिक सहयोग और आपसी विश्वास की वकालत भी की।