मिशन 'अमृत कवच', 45 साल के गंगरेल बांध को मिलेगा 'नया जीवन'; ₹65.5 करोड़ से होगा कायाकल्प!
मिशन 'अमृत कवच', 45 साल के गंगरेल बांध को मिलेगा 'नया जीवन'; ₹65.5 करोड़ से होगा कायाकल्प!
छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा और धमतरी की शान, रविशंकर सागर जलाशय (गंगरेल बांध) अब एक नए अवतार में नजर आने वाला है. 1978 में अपनी पहली बूंद सहेजने वाला यह विशाल बांध अब अपनी उम्र के 45 पड़ाव पार कर चुका है.
वक्त की मार और पानी के दबाव से इसकी मजबूती को बरकरार रखने के लिए जिला प्रशासन और राज्य शासन ने एक 'मास्टर प्लान' तैयार किया है.
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के विजन और सरकार की संवेदनशीलता के चलते इस बांध की सुरक्षा के लिए 65.5 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को हरी झंडी मिल गई है. यह सिर्फ मरम्मत नहीं, बल्कि बांध को आने वाली कई पीढ़ियों के लिए सुरक्षित बनाने का एक 'सुरक्षा कवच' है.
हाई-टेक होगी सर्जरी: पुराने घावों पर लगेगा तकनीक का मरहम
गंगरेल बांध को फिर से युवा बनाने के लिए इस बार सामान्य मरम्मत नहीं, बल्कि आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों का सहारा लिया जा रहा है. इस ‘सर्जरी’ के मुख्य आकर्षण होंगे:
- Epoxy Grouting: बांध की दीवारों और नींव के भीतर सूक्ष्म दरारों को भरने के लिए उन्नत रासायनिक मिश्रण का उपयोग, जो इसे पत्थर जैसा मजबूत बना देगा.
- High Pressure Water Jet: सालों से जमी गंदगी और रुकावटों को साफ करने के लिए अत्याधुनिक मशीनों का प्रयोग.
- VPD की सफाई: बांध के भीतर जल निकासी (Vertical Pressure Drain) के जो रास्ते चोक हो गए हैं, उन्हें फिर से चालू किया जाएगा ताकि बांध का आंतरिक दबाव संतुलित रहे.
कलेक्टर की हुंकार: “सुरक्षा से समझौता नहीं”
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद गंभीर हैं. उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है: “गंगरेल केवल मिट्टी और कंक्रीट का ढांचा नहीं है, यह हजारों किसानों की उम्मीद और लाखों लोगों की प्यास बुझाने का जरिया है. इसकी सुरक्षा हमारी टॉप प्रायोरिटी है. मानसून की पहली फुहार से पहले टेंडर और शुरुआती प्रक्रियाएं पूरी होनी चाहिए.”