राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एम्स नागपुर दीक्षांत समारोह में की शिरकत, कहा- तकनीक करुणा की जगह नहीं ले सकती
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एम्स नागपुर दीक्षांत समारोह में की शिरकत, कहा- तकनीक करुणा की जगह नहीं ले सकती
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार (15 अप्रैल, 2026) को महाराष्ट्र के नागपुर में एम्स नागपुर के दीक्षांत समारोह में शिरकत की और छात्रों को संबोधित किया।
चिकित्सा केवल पेशा नहीं, मानवता की सेवा का मार्ग
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं, बल्कि संवेदनशीलता के साथ मानवता की सेवा करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि एक डॉक्टर न केवल बीमारियों का इलाज करता है, बल्कि मरीजों के मन में उम्मीद भी जगाता है। डॉक्टरों की सहानुभूतिपूर्ण सलाह मरीज और उनके परिवार दोनों को शक्ति देती है।
डॉक्टर-रोगी संबंध में विश्वास जरूरी
राष्ट्रपति ने कहा कि डॉक्टरों को कठिन परिस्थितियों में भी मरीजों और उनके परिजनों के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मरीजों और उनके परिवारों को भी चिकित्सा पेशेवरों के प्रति सम्मान रखना चाहिए, ताकि डॉक्टर और रोगी के बीच विश्वास का संबंध मजबूत बना रहे।
स्वस्थ नागरिक, मजबूत राष्ट्र की नींव
उन्होंने कहा कि नागरिकों का अच्छा स्वास्थ्य राष्ट्र की प्रगति के लिए बेहद जरूरी है। पिछले एक दशक में भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा में विस्तार हुआ है। देशभर में नए एम्स की स्थापना से बेहतर इलाज और शिक्षा के अवसर बढ़े हैं।
एम्स नागपुर बना उत्कृष्टता का केंद्र
राष्ट्रपति ने खुशी जताई कि स्थापना के कुछ ही वर्षों में एम्स नागपुर ने चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी अलग पहचान बनाई है और यह लगातार उत्कृष्टता की दिशा में कार्य कर रहा है।
तकनीक के साथ मानवीय मूल्यों का संतुलन जरूरी
द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल हेल्थ और उन्नत अनुसंधान के जरिए तेजी से बदलाव आ रहे हैं। इन तकनीकों को अपनाना जरूरी है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रौद्योगिकी कभी भी करुणा, ईमानदारी और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण का स्थान नहीं ले सकती।
डॉक्टरों के लिए नैतिक जिम्मेदारी सर्वोपरि
उन्होंने कहा कि समाज में डॉक्टरों का उच्च स्थान है और लोग उन पर अपने जीवन की जिम्मेदारी सौंपते हैं। ऐसे में डॉक्टरों का नैतिक कर्तव्य है कि वे मरीजों के हित को सर्वोपरि रखें और अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वाह करें।
युवा डॉक्टरों को नवाचार और सीखने की सलाह
राष्ट्रपति ने युवा डॉक्टरों को नवाचार, अनुसंधान और निरंतर सीखने के प्रति प्रतिबद्ध रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जिज्ञासा और सीखने की इच्छा उन्हें बेहतर डॉक्टर बनाएगी और सेवा के अधिक अवसर प्रदान करेगी।
विकसित भारत के लक्ष्य में स्वास्थ्य क्षेत्र की अहम भूमिका
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विश्वास जताया कि नए डॉक्टर न केवल अपने करियर में सफल होंगे, बल्कि देश को स्वस्थ बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।