आरएसएस की जड़ें भारत के सांस्‍कृतिक और सभ्‍यतागत नैतिक मूल्‍यों में निहित हैं: दत्‍तात्रे होसबोले

आरएसएस की जड़ें भारत के सांस्‍कृतिक और सभ्‍यतागत नैतिक मूल्‍यों में निहित हैं: दत्‍तात्रे होसबोले

आरएसएस की जड़ें भारत के सांस्‍कृतिक और सभ्‍यतागत नैतिक मूल्‍यों में निहित हैं: दत्‍तात्रे होसबोले

राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्‍तात्रे होसबोले ने आरएसएस को स्‍वयंसेवकों द्वारा संचालित आंदोलन बताया है, जिसकी जड़ें भारत के सांस्‍कृतिक और सभ्‍यतागत नैतिक मूल्‍यों में निहित हैं। अमरीका के वॉशिंगटन डी सी में हडसन इन्‍स्‍टीट्यूट द्वारा आयोजित न्‍यू इंडिया सम्‍मेलन के दौरान उन्‍होंने कहा कि आरएसएस हिन्‍दू पहचान को किसी धार्मिक पहचान के रूप में नहीं बल्कि सभ्‍यतागत पहचान के रूप में देखता है। 

श्री होसबोले ने कहा कि आरएसएस सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से सेवा भाव और जीवन मूल्‍यों को प्रोत्‍साहित करने के लिए प्रतिदिन लगभग 83 हजार बैठकें करता है। उन्‍होंने कहा कि ऐसा जरूरी नहीं है कि सांस्‍कृतिक मूल्‍य और आधुनिकता एक- दूसरे के विरोधी हैं और इन दोनों का सह-अस्तित्‍व संभव है। उन्‍होंने कहा कि हाल क वर्षों में विभिन्‍न समाजों में संस्‍कृति और समाजिकता का सह-अस्तित्‍व देखने को मिला है