उद्योग और श्रम का समन्वित मॉडल : सरकार के प्रयासों से छत्तीसगढ़ बना निवेश और रोजगार का नया केंद्र

उद्योग और श्रम का समन्वित मॉडल : सरकार के प्रयासों से छत्तीसगढ़ बना निवेश और रोजगार का नया केंद्र

उद्योग और श्रम का समन्वित मॉडल : सरकार के प्रयासों से छत्तीसगढ़ बना निवेश और रोजगार का नया केंद्र

दिसंबर 2023 में विष्णुदेव साय के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद छत्तीसगढ़ ने विकास की दिशा में नई गति पकड़ी है। सरकार ने स्पष्ट किया कि केवल उद्योगों को बढ़ावा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन उद्योगों के लिए प्रशिक्षित, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने वाले श्रमिक भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

पहले की स्थिति
पूर्व समय (2018-2023) में उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया लंबी, जटिल और बहुस्तरीय थी, जिसमें अलग-अलग विभागों से अनुमति लेने में महीनों लग जाते थे। इस कारण निवेशकों का भरोसा कम हुआ और राज्य में उद्योग स्थापना की गति धीमी पड़ी। श्रम विभाग और उद्योगों के बीच समन्वय की कमी के कारण उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप कुशल श्रमिक उपलब्ध नहीं हो सके, जिससे बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार के लिए अन्य राज्यों का रुख करना पड़ता था। विकास का दायरा रायपुर व आसपास ही सीमित था, जबकि बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्र नक्सल प्रभाव और अविकसित बुनियादी ढांचे के कारण पिछड़ते रहे।औद्योगिक नीति 2024-30
वर्तमान सरकार ने नई औद्योगिक नीति 2024-30 लागू कर विकास की दिशा बदल दी। आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स और ग्रीन एनर्जी जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने से राज्य में निवेश का माहौल अत्यंत सकारात्मक हुआ। नीति लागू होने के बाद सिर्फ 14 महीनों में ही प्रदेश को ₹4 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए और कुल प्रस्तावित निवेश ₹7.83 लाख करोड़ तक पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि उद्योग विभाग निवेश आकर्षित करने में सफल रहा है, जबकि श्रम विभाग ने उस निवेश का समर्थन करने के लिए कार्यबल तैयार करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।