अनोखी अदालत, यहां भगवान के खिलाफ ही चलता है केस, जानवरों की गवाही पर मिलती है ऐसी सजा!

अनोखी अदालत, यहां भगवान के खिलाफ ही चलता है केस, जानवरों की गवाही पर मिलती है ऐसी सजा!

अनोखी अदालत, यहां भगवान के खिलाफ ही चलता है केस, जानवरों की गवाही पर मिलती है ऐसी सजा!

बस्तर में लगती है अनोखी अदालत:
बस्तर जिलेमें हर साल एक ऐसी अनोखी अदालत लगती है, जहां देवताओं के खिलाफ केस दर्ज किए जाते हैं। इतना ही नहीं, अगर भगवान दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें सजा भी सुनाई जाती है। यह अदालत साल में सिर्फ एक बार लगती है और इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।

भंगाराम देवी मंदिर में होती है जन अदालत:
बस्तर में आदिवासी आबादी काफी ज्यादा है और यहां गोंड, मारिया, भतरा, हल्बा और धुरवा जैसी जनजातियां निवास करती हैं। इसी क्षेत्र में स्थित भंगाराम देवी मंदिर में हर साल मानसून के दौरान 'भादो जात्रा' उत्सव मनाया जाता है। इस तीन दिवसीय उत्सव के दौरान ही यह अनोखी जन अदालत लगाई जाती है।

मुर्गियां और पशु-पक्षी बनते हैं गवाह:
इस अदालत की सबसे खास बात यह है कि यहां इंसानों के साथ-साथ मुर्गियां और अन्य पशु-पक्षी भी गवाही देते हैं। मान्यता है कि भंगाराम देवी खुद इस अदालत की अध्यक्षता करती हैं। इस दौरान लोग अपनी समस्याएं जैसे फसल खराब होना, बीमारी या अन्य परेशानियां भगवान के खिलाफ शिकायत के रूप में रखते हैं।

दोषी पाए जाने पर भगवान को मिलती है सजा:
अगर सुनवाई के दौरान भगवान दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें सजा भी दी जाती है। सजा के रूप में मंदिर में स्थापित मूर्तियों को कुछ समय के लिए मंदिर के पीछे रख दिया जाता है। कई बार यह सजा लंबे समय तक भी चलती है। जब तक शिकायतकर्ता की समस्या का समाधान नहीं हो जाता, तब तक भगवान को 'सजा' दी जाती है। समस्या सुलझने के बाद मूर्ति को फिर से मंदिर में स्थापित कर दिया जाता है।

इस अनोखे महोत्सव में करीब 240 गांवों के लोग शामिल होते हैं। मुकदमों की सुनवाई के बाद सभी के लिए सामूहिक भोज का आयोजन भी किया जाता है। यह परंपरा आस्था, विश्वास और स्थानीय संस्कृति का एक अनूठा उदाहरण है, जो आज भी लोगों के बीच जीवित है