भारतीय वैज्ञानिकों की नई उपलब्धि, फ्लोरोमेट्रिक तकनीक से निकोटीन-कोटिनिन स्तर का सटीक पता लगाने में सफलता

भारतीय वैज्ञानिकों की नई उपलब्धि, फ्लोरोमेट्रिक तकनीक से निकोटीन-कोटिनिन स्तर का सटीक पता लगाने में सफलता

भारतीय वैज्ञानिकों की नई उपलब्धि, फ्लोरोमेट्रिक तकनीक से निकोटीन-कोटिनिन स्तर का सटीक पता लगाने में सफलता
भारत सरकार के नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान मोहाली ने एक नई सामग्री विकसित की है जो फ्लोरोमेट्रिक संवेदन द्वारा निकोटीन और कोटिनिन के स्तर का पता लगा सकती है।
 
फ्लोरोमेट्रिक संवेदन एक ऐसी तकनीक है जो प्रतिदीप्ति उत्सर्जन का उपयोग करके विभिन्न मापदंडों को मापती है। वर्तमान मामले में, सेंसर के रूप में कार्य करने वाली यह सामग्री निकोटीन या कोटिनिन के संपर्क में आने पर ‘प्रकाशित’ हो जाती है, जिससे यह स्वास्थ्य क्षेत्र में तंबाकू के संपर्क का शीघ्र पता लगाने और समय पर कार्रवाई करने में उपयोगी हो जाती है। आमतौर पर यह सामग्री बहुत कम प्रकाश उत्सर्जित करती है, लेकिन जब यह सेंसर के माध्यम से इन हानिकारक रसायनों के संपर्क में आती है, तो यह तेज चमकने लगती है। इससे वर्तमान में उपयोग की जाने वाली विधियों की तुलना में पता लगाना बहुत आसान और त्वरित हो जाता है। इस नई तकनीक से, कम मात्रा को भी शीघ्रता और सटीकता से पहचाना जा सकता है, जो स्वास्थ्य सेवा और अनुसंधान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।